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स्वयं में परिवर्तन लाने के लिए स्थापित करते हैं वर्षायोग
आर्यिका अंतरमति माताजी का ससंघ वर्षायोग कलश स्थापना
इंदौर. वर्षायोग स्वयं में परिवर्तन लाने एवं आत्म निरीक्षण करने के साथ-साथ धर्म की साधना हेतु स्थापित किया जाता है जिसमें मूल भावना सूक्ष्मजीवों तक करुणा एवं अहिंसा के भाव निहित होते हैं. यह धन की नहीं अपितु धर्म एवं उत्तम संस्कारों को प्रदान करता है.
उक्त उद्गार आर्यिका आदर्श मति माताजी ने चंद्रप्रभु मांगलिक भवन तिलक नगर पर आयोजित आर्यिका अंतर मति माताजी के वर्षायोग कलश स्थापना के अवसर पर व्यक्त किये. ट्रस्ट के मंत्री हेमचंदजैन एवं संयोजक प्रसन्न जैन ने बताया कि कार्यक्रम मुख्य रूप से 5 प्रमुख कलशों सहित कुल 29 कलशों की स्थापना की गई ।
कलश प्राप्त करने का सौभाग्य मनोज चिरायु छाबड़ा, श्रीमती विमला सुधीर बिलाला,एस के सचिन जैन ,राहुल जैन एवं राजेंद्र सुमन जैन परिवार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में पंडित रतनलाल शास्त्री ब्र. स्वर्णा दीदी, शांता दीदी सहित हंसमुख गांधी ,सुरेंद्र बाकलीवाल, विमल अजमेरा, प्रदीप गोयल, सलिल बडज़ात्या, कैलाश लुहाडिय़ा, मनोज बाकलीवाल, जेनेश झांझरी,ए के जैन ,संतोष जैन सर, एम के जैन ,कीर्ति पंड्या,राजू श्रीफल सहित अनेक समाज जन एवं ब्रह्मचारी त्यागीव्रती उपस्थित थे.
कार्यक्रम के प्रारंभ में आचार्य श्री विद्यासागरजी की संगीतमय पूजन पंकज जैन के निर्देशन में की गई। कार्यक्रम में विद्यादर्शमंडल, विद्यासागर सेवादल, सुधा सागर मंडल ,पाठशाला के बच्चे,दि.जैन महासमिति एवं ट्रस्ट के पदाधिकारियों द्वारा पूजन कर श्रीफल भेंट किए कार्यक्रम के दौरान हस्तकरघा से निर्मित वस्त्रों की संक्षिप्त लघु नाटिका का मंचन भी किया गया. संचालन सचिन जैन एवं आभार राजेंद्र मोदी ने व्यक्त किया. उक्त जानकारी प्रचार संयोजक प्रदीप गोयल एवं ललित बडज़ात्या द्वारा दी गई.


